जनेऊ का महत्व
हिन्दु धर्म का प्रतिक मानी जाने वाली जनेऊ हमेशा पेहेन्कर् रखनी चाहिये. जनेऊ का मतलब धागोंका समूह जो तंत्र मंत्र
से सिद्ध् किया हो. किसने, किस उमर मे, कितने धागे पेहेनने चहिये ये सब १६ संस्कारो मे लिखा हुवा है.
हम जनेऊ को धागा या सूत भी केहेते है. लेकिन असल मे उसे तंतू कहा जाता है. जनेऊ ३ तंतुओं से बंता है, उसे
'यज्ञोपवीत त्रिसूत्र’ कहा जाता है. हर तंतू के छोर पर जो गाँठ होती है उसे ग्रंथी केहेते है. ऐसे ही ३ ग्रंथियों को जोड कर
जो गाँठ मारी जाती है उसे ब्रह्म् या अद्वैत गाँठ कहा जाता है.
ऐसा कहा जाता है की अगर बाये कंधेसे नाभी से होते हुए फिर पिछे से बाये कंधे तक नापेंगे तो ३२ अंगुली नाप निकलता
है। इसलिए ३ तंतूओं की एक जनेऊ ३२ अंगुली जितनी लंबी होती है। जनेऊ की लंबाई हमेशा नाभी तक ही होनी
चाहिए। (एक अंगुली मतलब हात की बिच की ऊँगली जितनी लंबाई)
जनेऊ कैसे, कब और कितने धागोंकी पहननी चाहिये?
जनेऊ को गायत्री मंत्र का जाप करते हुए बाये कंधे के उपरसे लेकर दाहिने हात के निचेसे कमर की ओर पेहेनना चाहिए।
खराब होजाए तो विधिवत पुजा करावा के नई जनेऊ पेहेन्ना चाहिय।
जनेऊ सबसे पहले ८ साल की उम्र में उपनयन की विधी संपन्न करके पहनाया जाता है। इस समय सिर्फ ३ तंतुओं की एक
ब्रह्मगाँठ की जनेऊ पहनाई जाती है। इस जनेऊ की लंबाई बच्चे के उस उम्र की ३२ अंगुली जितनी होती है।
समावर्तन की इस दूसरी विधी में ३ तंतुओं की एक ब्रह्मगाँठ वाला एक और जनेऊ पहनाई जाता है। मतलब समावर्तन
विधी के बाद (शादी से पहले) व्यक्ति को कुल ६ तंतूओंवाली २ ब्रह्मगाँठों की जनेऊ पहनाई जाती है। इसकी कुल लंबाई
व्यक्ति के उस उमरकी ६४ अंगुली जितनी होती है।
तीसरी बार शादी के समय ३ तंतूओंकी एक ब्रह्मगाँठ वाला एक और जानिव पहनाया जाता है। इस बार व्यक्ति के कंधे पे
कुल मिलके ९ तंतूओंवाली ३ ब्रह्म गाँठकी जनेऊ पहनाई जाती है। ये जनेऊ प्रौढ़ व्यक्तिके ९६ अंगुली जितनी लंबी होती
है।
५ कर्मेंद्रिय + ५ पंच प्राण + ५ तन्मात्रा + ५ पंच भूत + ६ भाव विकार + ६ अरिशदवर्ग + ६ शदुर्मी + ६ धातू + ४ अंतःकरण
+ ३ अवस्था + ३ देह + ३ जीव + ३ कर्म + ५ कर्मेंद्रिय क्रिया + ४ मनःक्रिया + ४ मानस अवस्था स्थिती + १४ देवता + ८
आत्मगुन + १ परब्रह्म को मिलाके कुल ९६ अंगुली का नाप बनता है।
जनेऊ किसने पहनना चाहिए?
वेदों में लिखा है की जनेऊ हर वर्ण के लोगोंको पेहेनना चाहिए। फर्क बस जानिव की लंबाई में होता है।
ब्राह्मणोंको ९६ अंगुली जितना लंबा जनेऊ पेहेनना चाहिए।
क्षत्रियोंको ९२ अंगुली जितना लंबा जनेऊ पेहेनना चाहिए।
वैश्योंको ९० अंगुली जितना लंबा जनेऊ पेहेनना चाहिए।
ऐसा माना जाता है की जनेऊ की ३ गाँठे सात्विक, राजसिक आणि तामसिक गुणोसे नियंत्रित होती है जो आत्मा की,
विचारों की और शरीर की शुद्धता दर्शाता है।
ज्ञानेश्वर महाराज ने तो अपने ज्ञानशरी ग्रंथ में जनेऊ को नवरत्न की माला का स्थान दिया है।
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