नवरात्री के प्रकार
नवरात्री भारत में मनाए जानेवाले सबसे शुभ त्योहारों में से एक है। पर क्या आप जानते हैं, हर साल शक्ति को अर्पित एक नहीं बल्कि चार नवरात्रियाँ होती हैं?
पहले आती है चैत्र नवरात्री, जिसे बसंत नवरात्री के नाम से भी जाना जाता है। इसका प्रारंभ चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (प्रथम) तिथि पर होता है। यह हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है। चैत्र नवरात्री बसंत से ग्रीष्म ऋतु का बदलाव दर्शाती है। दुर्गा माँ के नौ रूपों की आराधना इन नौ दिनों में की जाती है। भक्तजन कठोर उपवास के द्वारे शरीर को मौसमी परिवर्तन के लिए तैयार करते हैं, इससे बदहज़मी से बचाव होता है। ये नवरात्री भारत के उत्तरी व पश्चिमी प्रदेशों में मनाई जाती है। चैत्र नवरात्री की नवम तिथि को हम राम नवमी के नाम से मनाते हैं, जिसकी वजह से इसका नामकरण राम नवरात्री भी हुआ है।
अगले दो प्रकार, जिन्हे गुप्त नवरात्री कहते हैं, माघ और आषाढ़ महीने में मनाए जाते हैं। इन दोनों का महत्व तंत्र साधना में विलीन साधकों के लिए खास मायने रखता है। वे तंत्र शैली की १० महाविद्या देवियों का अध्ययन करके बल बढ़ाते हैं। आषाढ़ नवरात्री, जिसे शाकंभरी वा गायत्री नवरात्री भी कहा जाता है, आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है (जून-
जुलाई)। माना जाता है की यह नवरात्री का उपवास अच्छी बरसात के लिए भी रखा जाता है। माघ नवरात्री माघ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर शुरू होती है (जनवरी-फरवरी)।
चौथी नवरात्रि को शरद नवरात्रि कहा जाता है। यह अश्विन माह में मनाई जाती है व शरद ऋतु का आरम्भ इस समय होता है। इस नवरात्रि में शक्ति के नौ रूपों को पूजा जाता है, हर दिन एक रूप के नाम – शैलपुत्री, ब्रह्मचरणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा,
स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्री, महागौरी, व सिद्धिदात्री, जिन्होंने मिलकर महिषासुर राक्षस को नष्ट किया। इसी समय दक्षिण भारत में लक्ष्मी एवं सरस्वती माता की आराधना इस नवरात्रि में होती है। भारत मे नवरात्री उत्सव को बडे उसासे
मनाया जात है।
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